आतंकियों को रोकने के लिए चीन ने कसी कमर, ISIS के हार के बाद सीरिया से हो रही वापसी

बीजिंग: चीन ने इस्लामिक स्टेट संगठन को मिली शिकस्त के बाद सीरिया से लौट रहे आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए उयगुर मुस्लिम बहुल शिंजियांग प्रांत में सीमा सुरक्षा बढ़ा दी है. चीन ने अलगाववादी ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) से निपटने के लिए अफगानिस्तान की सीमा से लगे शिंजियांग, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और किर्गिजिस्तान में काफी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया है. इस संगठन को प्रांत में और चीन में पिछले कुछ बरसों में कई सारे हिंसक हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. उयगुर के कई सारे युवाओं के सीरिया में आईएस में शामिल होने और प्रशिक्षण लेने की खबर है. इसके चलते चीन को इस बात की आशंका है कि वे लोग शिंजियांग में हमले करने के लिए लौट सकते हैं.

बीजिंग में नियुक्त सीरियाई राजदूत ने इमाद मुस्तफा के हवाले से पिछले साल बताया गया था कि उयगुर से 5000 तक जातीय उयगुर सीरिया में लड़ाई लड़ रहे हैं. शिंजियांग काशगर प्रांत में सीमा रक्षा के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों के नियंत्रण और प्रबंधन को हाल के बरसों में मजबूत किया गया है.

चीन की योजना अफगानिस्तान में आतंकवाद रोधी एक केंद्र बनाने की भी है ताकि उयगुर आतंकवादियों के लौटने से निपटा जा सके लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करने से इनकार कर दिया. एक केंद्र स्थापित किए जाने के प्रस्ताव के बारे में चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता लु कांग ने गुरुवार (11 जनवरी) को यहां कहा, ‘‘मैं आपके द्वारा जिक्र की गई सूचना के बारे में नहीं सुना है.’’

वहीं दूसरी ओर चीन की सेना की सभी शाखाओं ने डोकलाम प्रकरण के बाद पठार क्षेत्र में प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए देश के भीतर और विदेश में सैन्य अभ्यास बढ़ा दिए हैं. आधिकारिक मीडिया ने इसकी जानकारी दी है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) थल सेना, नौसेना, रॉकेट (मिसाइल) बल और सशस्त्र पुलिस के साथ देश एवं विदेश में अभ्यास कर राष्ट्रपति शी चिनफिंग के तीन जनवरी को दिए सैन्य प्रशिक्षण के निर्देशों को क्रियान्वित कर रही है. सेना के आधिकारिक दैनिक मुखपत्र ‘पीएलए डेली’ ने कहा कि रडार में न आने वाले जी-20 सेनानी विमान, वाय-20 परिवहन विमान, एच-6 के बमवर्षक और जे-16, जे-11बी जे-10सी सैन्य विमान सहित चीन के सबसे विकसित विमान वर्ष 2018 की शुरुआत से ही अभ्यास कर रहे हैं.

‘पठार क्षेत्र’ से यहां अभिप्राय तिब्बती पठार से है जो भारत और चीन के बीच लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को कवर करता है. सरकारी समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने पीएलए के एक सेवानिवृत्त अधिकारी (जिसने नाम उजागर न करने की शर्त पर जानकारी दी) के हवाले से कहा, ‘‘सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय थल सैनिकों की संख्या अधिक है, जिसका युद्ध होने पर उन्हें कुछ फायदा मिलेगा. चीन की नौसेना को आसमान में अपना प्रभुत्व बनाने और तत्काल चीन को लाभ की स्थिति में लाने की आवश्यकता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए पठार क्षेत्र में सैन्य अभ्यास बढ़ाना बेहद आवश्यक है.’’ इससे पहले भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर गतिरोध 73 दिनों तक चलने के बाद 28 अगस्त को थमा था.

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