अमेरिकी रिपोर्ट में जताई गई चिंता

अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने आशंका जाहिर की है कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान दक्षिण एशिया में अमेरिकी हितों के लिए घातक साबित हो सकता है. पाकिस्तान का झुकाव 2019 तक अमेरिका से हटकर चीन की तरफ बढ़ जाएगा. अमेरिका ने अपनी इस रिपोर्ट में भारत के पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और चीन को लेकर भी कई आशंकाएं जाहिर की हैं.

अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर डेनियल आर कोट्स ने अमेरिकी कांग्रेस में वर्ल्डवाइड थ्रेड असेसमेंट रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि भविष्य में अमेरिकी हितों के आड़े कौन-कौन से देश आ सकते हैं. अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA), डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA), फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) और नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA) समेत कुल 17 खुफिया एजेंसियों ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है.

दक्षिण एशिया में अमेरिकी हितों पर नजर

अमेरिका की यह रिपोर्ट भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को लेकर आशंका जाहिर की गई है कि 2019 तक वह चीन के ज्यादा करीब हो जाएगा जो दक्षिण एशिया में अमेरिकी हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेताया है कि यह देश लगातार नए परमाणु हथियारों की तैनाती, आतंकवादियों को संरक्षण देने, आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम न उठाने और चीन के और करीब आने से नया खतरा बन सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान न सिर्फ भारत और अफगानिस्तान, बल्कि अमेरिकी हितों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है. गौरतलब है कि पाकिस्तान शॉर्ट रेज के हथियार, समुद्र आधारित क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल जैसे परमाणु हथियार विकसित कर रहा है. इससे दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ सकता है.

भारत पर एक और हमले से बिगड़ेंगे हालात

अमेरिका ने अपनी खुफिया रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बढ़ती तल्खी का भी जिक्र किया है. इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर सीजफायर का उल्लंघन तनाव को और बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत पर एक और हाई प्रोफाइल आतंकवादी हमला या फिर एलओसी पर गोलाबारी बेहद घातक साबित हो सकता है.

चीन से भारत के रिश्ते और बिगड़ेंगे

अमेरिकी संसद में पेश की गई खुफिया रिपोर्ट में भारत और चीन के रिश्तों का भी जिक्र किया गया है. पिछले साल अगस्त में डोकलाम में तीन महीने तक भारत और चीनी सेना के बीच चले गतिरोध को तनाव और बढ़ने की वजह बताया गया है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने आशंका जाहिर की है कि 2019 तक दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ सकते हैं.

अफगानिस्तान पर भी नजर

अफगानिस्तान की अस्थिर सरकार पर भी अमेरिका खुफिया एजेंसियों ने चिंता जाहिर की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता, तालिबान के हमले और लगातार आर्थिक रूप से कमजोर होना अमेरिकी हितों के लिए भी खतरा बन सकता है. अमेरिकी एजेंसियों ने आशंका जाहिर की है कि आगामी राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा सरकार की वापसी आसान नहीं होगी. अफगानिस्तान की आर्थिक विकास दर 2.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है. ऐसे में उसे वैश्विक मदद पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ सकता है.

मध्य एशिया में धाक जमाना चाहता है रूस

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आशंका जाहिर की है कि रूस मध्य एशिया में अमेरिकी दखल को कम करते हुए अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश कर सकता है. अमेरिकी एजेंसियों ने रिपोर्ट में कहा है कि रूस मध्य एशियाई देशों के नेताओं पर दबाव बनाते हुए अपना प्रभाव और बढ़ाने का प्रयास करेगा.

 

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