Budget 2023: ऐसे बनता है हमारे भारत देश का बजट, समझें पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली:  How does government prepare its Union Budget every year: अगले महीने भारत सरकार संसद में अपना बजट पेश करेगी. ये बजट वित्तीय वर्ष 2023-2024 के लिए होगा. नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार के दूसरे टर्म का ये चौथा बजट होगा. इस बार के बजट से पूरे देश को काफी उम्मीदें हैं. जनता को उम्मीद है कि सरकार टैक्स में छूट देगी. इसके अलावा बजट से किस मद में कितना पैसा सरकार खर्च करेगी, इस पर भी जनता की नजर बनी रहेगी. सबसे जरूरी बात बजट घाटे से जुड़ी है, तो सरकार इसे लेकर क्या कदम उठाती है, वो भी देखने वाली बात होगी. बहरहाल, हम आपको बता रहे हैं कि आखिर भारत देश का बजट तैयार कैसे होता है. तो आईए, समझते हैं बजट को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया…

6 माह पहले ही शुरु हो जाती है प्रक्रिया

भारत सरकार संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत बजट ( Budget ) पेश करती है. इस बजट को बनाने में काफी समय और पैसा खर्च करना होता है. यूं तो बजट बनाने की प्रक्रिया अगस्त-सितंबर में ही शुरू कर दी जाती है. जो बजट के पेश करने से 6 माह पहले का ही समय होता है. भारत देश का बजट वित्त मंत्रालय तैयार कराता है, इसके लिए वो नीति आयोग के साथ अन्य मंत्रालयों से भी चर्चा करता है. बजट बनाने का काम वित्त मंत्रालय के बजट डिवीजन के तहत डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (DEA) करता है. यही एजेंसी बजट तैयार करने के लिए नोडल एजेंसी होती है. बजट बनाने में ये खास स्टेप फॉलो किये जाते हैं…

सर्कुलर इश्यू करना : इसके तहत सर्कुलर इश्यू किया जाता है और सरकार के सभी विभागों से आय और संभावित व्यय का ब्यौरा मांगा जाता है.

आय और व्यय की स्क्रूटनी : इस प्रक्रिया के तहत खर्चों और व्यय में आवश्यक काट छांट की जाती है.

अनुमानों पर गहन चर्चा : इस प्रक्रिया में विशेषज्ञों की राय शामिल की जाती है. इसके बाद ही चीजें वित्त मंत्रालय के पास फाइनली बढ़ाई जाती हैं.

बजट अनुमानों को वित्त मंत्रालय के पास भेजना : इस प्रक्रिया में सभी विभागों का लेखा-जोखा और संभावित आय-व्यय को वित्त मंत्रालय में भेजा जाता है.

प्री-बजट मीटिंग : बजट से जुड़ी कई बैठकें होती हैं. इसके बाद बजट लगभग तैयार हो जाता है.

वित्त मंत्री का आखिरी निर्णय और प्रधानमंत्री के साथ चर्चा : बजट को वित्त मंत्री के पास भेजा जाता है. वो इस पर आखिरी निर्णय लेते हैं. इसके बाद प्रधानमंत्री के साथ चर्चा करते हैं.

संसद में बजट का पेश होगा : प्रधानमंत्री से चर्चा के बजट को संसद में पेश किया जाता है. इसी स्टेप पर जनता को पता चलता है कि इस साल सरकार ने बजट में क्या-क्या बाते कही हैं.

वित्त विधेयक लाना, राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी : संसद के दोनों से सदनों से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलती है और सरकार वित्त विधेयक पेश करती है. और वो वित्त आधिकारिक तौर पर लागू हो जाता है.

 

साल 1860 में पेश हुआ था भारत का पहला बजट

भारत के लिए पहला बजट 18 फरवरी 1860 को पेश किया गया था. इसे जेम्स विल्सन ने पेश किया था. जब बजट अंग्रेजी सरकार की तरफ से बनाया जाता था. वहीं, आजाद भारत में पहला बजट 26 नवंबर 1947 को आर के षणमुखम चेट्टी ( RK Shanmukham Chetty ) ने पेश किया था. काफी सालों तक बजट रात के समय पेश किया जाता था. लेकिन यशवंत सिन्हा ने वित्तमंत्री रहते हुए इस परंपरा को बदला था. कुछ साल पहले तक भारत का रेल और वित्त बजट अलग अलग पेश होता था. लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे मिलाकर एक कर दिया.

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