नई दिल्‍ली: PLA दिवस पर शी जिनपिंग की दुनिया को धमकी

नई दिल्‍ली: दुनिया इस समय कोरोना से जूझ रही है तो चीन अपने पड़ोसियों के खिलाफ युद्ध के हालात पैदा करने के साथ ही हथियारों का जखीरा बढ़ाने में लगा हुआ है। ऐसे में चीन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) दिवस पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी हथियारों के आधुनिकरण की बात कही है। उन्‍होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि चीन अपने राष्ट्रीय रक्षा और सशस्त्र बलों को पूरी तरह से आधुनिक बनाने के लिए एक नई यात्रा की शुरुआत करेगा।

चीन के राज्य समर्थित मीडिया ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, शी जिनपिंग ने कहा कि सीपीसी जल्द ही चीनी सेना को ‘विश्व स्तरीय बलों’ में बदल देगी। शी जिनपिंग के बयान आते ही चीन ने अपना 90 वां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) दिवस मनाया। यह दिन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के लिए विशेष महत्व रखता है, जिसने 1927 के नानचांग विद्रोह के रूप में चीन की नेशनलिस्ट पार्टी पर जीत हासिल की।

पीएलए का इतिहास

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का इतिहास आधिकारिक तौर पर 1 अगस्त, 1927 के नानचांग विद्रोह से शुरू होता है, जिसे सालाना PLA दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन चीन की नेशनल पार्टी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच पहली बार आमना-सामना हुआ था। कुओमिन्तांग द्वारा 1927 के शंघाई नरसंहार का मुकाबला करने के लिए सीपीसी द्वारा चीनी गृह युद्ध की शुरुआत की गई थी। अंतत: कम्युनिस्ट ताकतों ने सफलता हासिल करते हुए नानचांग पर कब्जा कर लिया और 5 अगस्त तक कुओमिन्‍तांग बलों की घेराबंदी से बचाया।

1927 से शुरू हुआ चीन का गृह युद्ध करीब 22 साल बाद तक चला और 1949 में कम्यूनिस्टों ने नेशनल कुओमिन्तांग पार्टी और उसके मुखिया चियांग काई शेक को चीन से भागने पर मज़बूर कर दिया। इस जीत के बाद 1 अक्टूबर, 1949 को माओ ने कम्यूनिस्ट चीन की नींव रखी और देश का नया नाम पड़ा पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना। इसके साथ ही ऑर्मी को भी नया नाम मिला, जिसके पीपल्स लिबरेशन आर्मी और शॉर्ट में PLA कहा गया।

आज PLA दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य बलों में से एक है, जिसमें दो मिलियन से अधिक सदस्य हैं। जबकि चीन ने सभी पुरुषों के लिए 18 वर्ष के होते ही सैन्य सेवा अनिवार्य है। पीएलए सीपीसी के केंद्रीय सैन्य आयोग के अधीन है, न कि राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के अधीन, जो राज्य परिषद के तहत काम करता है।

दक्षिण चीन सागर में तनाव जारी

इस बीच दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता जारी है। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ते तनाव के बीच कम्युनिस्ट देश ने हवाई अभ्यास के लिए दक्षिण चीन सागर पर लंबी दूरी के बमवर्षक भेजे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी ने जून में चीन के खिलाफ आवाज उठाई और बीजिंग पर आरोप लगाया कि वह पड़ोसियों के बीच कलह पैदा करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, पांच अन्य देश भी दक्षिण चीन सागर पर दावा करते हैं, जिसके माध्यम से सालाना लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार होता है।

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