एक बार शाम को संध्या के समय बाबा शिव माता पार्वती भ्रमण को निकले-घूमते घूमते अयोध्या नगरी पहुंचे तो

एक बार शाम को संध्या के समय बाबा शिव माता पार्वती भ्रमण को निकले,,, घूमते घूमते अयोध्या नगरी पहुंचे तो भोलेबाबा की नजर श्रीराम जी पर पड़ी, राम जी अपने राज्य में किसी किसी के दरवाजे पर जा कुछ कह रहे थे फिर आगे बढ जा रहे थे,,,
महादेव को जिज्ञासा हुई, उन्होंने वहीं से ध्यान से सुना,,,, राम जी ब्राह्मण से निवेदन कर रहे थे कल हमारे यहां श्राद्ध है आप जीमने आइएगा, ये कह राम जी आगे बाद गए,,,
महादेव खुश, पार्वती माता से बोले कल हम भी जाएंगे, श्रीराम जी के यहां हम भी श्राद्ध खाएंगे,,,
माता आश्चर्यचकित, माता बोली आप को जो इच्छा हो मै वो बना देती हूं आप जी भर खाइएगा किन्तु ऐसे श्राद्ध खाने जाना ठीक नहीं, श्रीराम जी ने आप को बुलाया थोड़ी है,,,,
भोलेबाबा तो हठी औघड़ी कहे मुझे तो जाना है, राम जी के यहां श्राद्ध है,, राम जी स्वयं खिलाएंगे,,,
माता ने बहुत समझाया नहीं माने,,,,
दूसरे दिन पहुंच गए जी राम जी के महल में, ब्राह्मण रूप धर,,,,,(मेरा भोला ऐसे ही है☺️)
बैठ गए सभी ब्राह्मणों संग पंगत में,,, ना ना प्रकार के व्यंजन,,,, माता सीता संग सभी जिमाने की सेवा में लग गए,,,,
सारे ब्राह्मण तृप्त हो उठ खड़े हुए, सब को दान दक्षिणा भर भर मिली, सब जाने लगे,,, किन्तु माता सीता अब भी ला ला परोसे जा रही थी, थकी परेशान,,, माता कौशल्या ने पूछा अब किसके लिए लेे जा रही हो सब ब्राह्मण तो जा रहे है,,,
माता सीता ने बताया, मां अभी एक ब्राह्मण देव बैठे है उनकी सेवा चल रही है,,,, वो सर झुकाए बस जिमने में लगे है, अभी तक उन्होंने सिर उठा किसी को देखा तक नहीं,,, व्यंजन मिष्ठान्न के लिए कहते है, थोड़ा थोड़ा क्या रख रहे हो,,,, सरा पतिला, भगोना रख दो,,, थोड़ा थोड़ा लाने का झंझट खत्म,,,
माता कौशल्या बोली कमी क्या है, इतने पकवान मिष्ठान व्यंजन है जी भर पाने दो,,,
माता सीता बोली, मां सब समाप्त होने वाला है और अब तक उन देवता ने जल का एक घुट तक नहीं पिया,,,,
लक्ष्मण जी बोले, मै उनको जल पीला आता हूं,,,,
लक्ष्मण जी गए जल लेे, कहा ब्राह्मण देव जल लीजिए,,,
ब्राह्मण रूप धर महादेव बोले, जब आधा होता है तब हम जल लिए है उस से पहले नहीं,,,,
लक्ष्मण जी ने का के बताया,,,,, अभी तो आधा भी तृप्त नहीं हुए😲 और पूरा भंडार ग्रह ख़ाली,,,
माता केकई ने बोला नगर बाजार से मंगवा लो,,,
वो भी मंगवाया,,,, सारे नगर का अन्न चट,,😋
माता सुमित्रा बोली, पड़ोस के राज्य से मंगवाओ,,,
रथ दौड़े, छकड़े दौड़े,,, भर भर समान आने लगा,,,,
भोलेबाबा बोले अरे अंदर कहां लेे जा रहे हो, यही रख दो,,, अंदर लेे जाओगे, फिर बाहर लाओगे,,, समय नष्ट होगा,,,,
माता सीता गई श्रीराम जी के पास,, सारा हाल सुनाया,,,, राम जी आए देखने,,,, देखते ही पहचान गए,,,,
राम जी ने माता सीता से कहा,,, इनको जीमना हम में से किसी के बस की बात नहीं,,,,
पूरी सृष्टि में, तीनों लोको में इनको केवल एक ही जीमा सकती है, केवल वो ही इनको तृप्त कर सकती है,,, वो मां अनपुर्णा जगदम्बे मां पार्वती,,,, और किसी के बस की बात नहीं,,,
श्रीराम जी ने ध्यान स्तुति की महामाई पार्वती अनुपर्णा की, ,,,, माता आई,,,,, राम जी ने मुक भाषा में मईया से कहा,,, अब आप ही संभालिए अपने महाराज को,,, ये भोलेनाथ किसी के बस की बात नहीं,,,,
महामाई अनपूर्णा ने केवल दो लड्डू बनाए,,,,, थल में परोस दिया महाराज जी के,,,, भोलेबाबा आश्चर्यचकित केवल दो लड्डू,,,, केवल दो,,,,(इनसे मेरा क्या होगा😒)
भोलेबाबा ने उठाया एक लड्डू,,,, मुख में लगाए,,,, थोड़ा सा तोड़ा ही था,,, थोड़ा सा जिव्ह पर छुआ ही था 😳 डकार अा गई, तृप्ति हो गई,,,, भोले बाबा समझ गए,,,, अा गई महारानी,,,,
भोलेबाबा ने पहली बार नजर उठाई, मां पार्वती ने नयन मटका कहा कैसे हो,,,,(अब होना कैसे है, बाधा जो अा गई😭)
श्रीराम जी ने पूजन किया,,,, महादेव प्रसन्न हो बोले प्रभु आज मै बड़ा प्रसन्न हूं,,,,
राम जी ने कहां, प्रभु आप प्रसन्न है तो एक वर दीजिए,,
भोलेबाबा बोले आप तो आज्ञा करे प्रभु,,,
राम जी बोले, प्रभु केवल यही विनती है कि जहां जहां श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध हो वहा आप जाए, आप के जाने से वो मृत आत्माएं तर जाएगी, मुक्त हो जाएगी, पितरलोक में आंनद से रहेंगी और कभी श्राद्ध का अन्न, भोजन कम न हो,,,,
भोलेनाथ बोले आप की इच्छा शिरोधार्य,,,,,
तब से हर श्राद्ध में किसी भी रूप में भोलेबाबा आते है,,,, सब के घर जहां श्राद्ध हो रहा हो,,, कुत्ता, बिल्ली, चूहा, चिटा, गाय, कव्वा, चिड़िया, कीड़ा,,, कुछ भी रूप धर बाबा आते है,,,,
और श्राद्ध का भोजन बच ही जाता है,,, भले वो थोड़ा सा बचे,,,, कम नहीं पड़ता,,,
जय महादेव
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