नई दिल्ली: शरद पवार के खिलाफ केस दर्ज, कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में ईडी ने की कार्रवाई

नई दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राकांपा प्रमुख शरद पवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। ईडी ने महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में यह कार्रवाई की है। शरद पवार के भतीजे अजित और अन्य के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया। ईडी की कार्रवाई उस वक्त की गई, जब महाराष्ट्र में 6 महीने के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं।

ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत इन्फोर्समेंट केस इन्फर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। यह पुलिस एफआईआर की तरह होती है। ईडी ने मुंबई पुलिस की एफआईआर के आधार पर केस दर्ज किया है। इसमें बैंक के पूर्व चेयरमैन, महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और कोऑपरेटिव बैंक के 70 पूर्व कर्मचारियों के नाम हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट भी दे चुकी है आदेश
बीते 22 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनसीपी नेता अजित पवार और 69 अन्य के खिलाफ महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक स्कैम में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। ईडी की जांच के बाद इसमें शरद पवार का नाम बढ़ाया गया।

पुलिस ने भी इन धाराओं में दर्ज किया था केस
मामले में पुलिस ने शरद पवार, अजीत पवार के अलावा विजय सिंह, मोहिते पाटील, आनंदराव अडसूल, शिवाजी नलावडे समेत बैंकों के तत्कालीन संचालकों, अधिकारियों के खिलाफ धारा 420, 409, 406, 465, 467, 468, 34, 120 (बी) के साथ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

क्या है मामला?
घोटाले के संबंध में की गई शिकायत में राकांपा नेता अजित पवार के अलावा राकांपा के हसन मुश्रीफ व कांग्रेस नेता मुधकर चव्हाण के अलावा बैंक के अलग-अलग जिलों में खुली बैंक की शाखों के वरिष्ठ अधिकारियों का समावेश है। ये सभी नेता इस बैंक के संचालक रह चुके है। शिकायत में दावा किया गया है कि 2007 से 2011 के बीच बैंक को करीब एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। मामले को लेकर नाबार्ड व महाराष्ट्र सहकारिता विभाग की ओर से मामले को लेकर दायर की गई रिपोर्ट में बैंक को हुए नुकसान के लिए राकांपा नेता अजित पवार व बैंक के दूसरे निदेशकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक अधिकारियों की निष्क्रियता व उनके द्वारा लिए गए निर्णय के चलते बैंक को काफी नुकसान हुआ है।

कर्ज देने के नियमों में किया गया था उल्लंघन
नाबार्ड की आडिट रिपोर्ट के मुताबिक शक्कर कारखानों को कर्ज देने में बड़े पैमाने पर बैंक की ओर से कर्ज देने में नियमों का उल्लंघन किया गया है। तत्कालीन समय में रांकपा नेता अजित पवार बैंक के निदेशक थे। नाबार्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई एफआईआर नहीं दर्ज की गई थी।

सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र अरोड़ा ने इस मुद्दे को लेकर पहले पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में साल 2015 व 29 जनवरी 2018 को शिकायत की थी। इसके बाद अधिवक्ता एसबी तलेकर के माध्यम से प्रकरण को लेकर एफआईआर दर्ज किए जाने का निर्देश देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

मैं कभी किसी बैंक का निदेशक नहीं रहा, लेकिन अगर मुझ पर आरोप लगाए गए हैं, तो मैं इसका स्वागत करता हूं।

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