नई दिल्ली: महुआ मोइत्रा के खिलाफ क्या हो सकती है कार्रवाई?क्या है लोकसभा की एथिक्स कमेटी का काम?

लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने अगर सांसद पर लगे आरोपों को सही पाया, तो महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता तक जा सकती है.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ( Mahua Moitra) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने का मामला अब लोकसभा की एथिक्स कमेटी में पहुंच गया है. विभिन्न दलों की 15 सदस्यीय ये कमेटी अब इस मामले की जांच करेगी. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने स्पीकर ओम बिरला से इसको लेकर शिकायत की थी और मांग की थी कि महुआ मोइत्रा के संसदीय आचरण की जांच कराई जाए.

वहीं महुआ मोइत्रा ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया है और कहा है कि वो किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं.

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखी चिट्ठी में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के लिए बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से गिफ्ट और घूस लिए.

निशिकांत दुबे ने स्पीकर और केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखी चिट्ठी
निशिकांत दुबे ने स्पीकर के अलावा एक पत्र केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को भी लिखा और मांग की कि महुआ मोइत्रा के लॉग इन आइडी और IP ऐड्रैस की जांच की जाए. वहीं मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी माना कि जो सवाल महुआ मोइत्रा ने संसद में पूछे थे, और कारोबारी दर्शन हीरानंदानी ने उनको जो खत लिखे थे, उन दोनों की भाषा बिल्कुल मिलती-जुलती है.

अगर एथिक्स कमेटी ने सांसद पर लगे आरोपों को सही पाया, तो महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता तक जा सकती है.

आइए आपको बताते हैं कि एथिक्स कमेटी में कौन-कौन हैं और ये कैसे काम करती है?
बीजेपी सांसद विनोद सोनकर एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष हैं. उनकी अध्यक्षता में ही लोकसभा की ये कमेटी महुआ मोइत्रा के मामले की जांच करेगी. एथिक्स कमेटी का काम नैतिक तौर पर किसी भी सांसद पर लगे आचरण से जुड़े आरोप की जांच करना है. इसके पास सभी तरह की ऐसी शिकायत जो लोकसभा स्पीकर द्वारा भेजी जाती है, उसकी जांच करता है. जैसे आज ओम बिरला ने महुआ मोइत्रा का मामला इस कमेटी के पास भेजा है. अब कमेटी इसकी जांच करेगी और शुरुआती जांच में कुछ ऐसा लगता है, तो ये कमेटी महुआ मोइत्रा से भी पूछताछ कर सकती है. साथ ही आरोप लगाने वाले सांसद निशिकांत दूबे से भी सबूत मांगे. जा सकते हैं.

इसको लेकर राज्यसभा में तो स्पष्ट नियम बने हुए हैं, लेकिन लोकसभा में कोड ऑफ कंडक्ट का मामला पेंडिंग है. ये अब तक फाइनलाइज्ड नहीं हुआ है, लेकिन कोई भी भारतीय किसी सांसद के जरिए एथिक्स कमेटी से किसी सांसद के नैतिक आचरण की शिकायत कर सकती है.

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