समरकंद में एससीओ की बैठक से क्या मिलेगा संदेश, दुनिया की टिकी नजर

शंघाई सहयोग संगठन की दो दिवसीय 22वीं बैठक में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के समरकंद पहुंच चुके हैं। उनकी रूस और उजबेकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों से द्विपक्षीय बातचीत भी होगी।

मुख्य बातें
  • 2001 में एससीओ का हुआ था गठन
  • 2017 में भारत और पाकिस्तान पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल
  • एससीओ में आठ पूर्ण सदस्य

करीब दो साल के बाद समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक का आगाज होने जा रहा है। सभी सदस्य देशों के माननीय समरकंद पहुंच चुके हैं। यह बैठक तब हो रही है जब रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई जारी है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अलग अलग रूप में सामने आता रहा है, हालांकि पीपी-15 से डिस्इंगेजमेंट के बाद रिश्तों में थोड़ी नरमी आई है। इन सबके बीच कुछ अहम सवाल यह है कि क्या एससीओ अपने मकसद को पूरा कर रहा है। क्या आतंकवाद के खिलाफ जो दृढ़ता दिखानी चाहिए वो नजर आई क्योंकि पाकिस्तान की आदत और भूमिका से हर कोई वाकिफ है।

जब बैठक में आमने सामने होंगे दिग्गज
उज्बेकिस्तान के समरकंद में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और पुतिन के बीच व्यापार और भू-राजनीति पर चर्चा करने की उम्मीद है। दोनों नेता एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और संयुक्त राष्ट्र और जी20 में द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करेंगे।यह ध्यान दिया जा सकता है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बैठक होगी। इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पीएम मोदी ने कीव में सैन्य व्यस्तताओं के बीच पुतिन को डायल किया था। उन्होंने क्रेमलिन नेता से पूर्वी यूरोपीय देश में हिंसा को तत्काल बंद करने का आग्रह किया।

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