जिमीकंद के फायदे व नुकसान क्या हैं?

जिमीकंद सिर्फ सब्जी भर नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से प्राकृतिक जड़ी-बूटी जैसे फायदे भी हैं। यह दिखने में हाथी के पैर जैसा लगता है, इसलिए इसे एलीफैंट फुट याम भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम अमोरफोफ्लस पाओनीफोलिअस (Amorphophallus Paeoniifolius) है[1] । इसे अंग्रेजी में याम (Yam) के नाम से भी जाना जाता है। जिमीकंद एक कंद के रूप में होता है और यह अपने आप ही उगता है, लेकिन इसके गुणों को देखते हुए पिछले कुछ सालों से इसकी खेती भी की जाने लगी है। ये कई प्रकार के होते हैं।

जिमीकंद के प्रकार – जिमीकंद कई प्रकार में मौजूद हैं, नीचे जानिए जिमीकंद की कुछ खास किस्मों के बारे में।

संतरा गाची : संतरा गाची जिमीकंद की एक किस्म है। जिमीकंद की इस किस्म के पौधे बड़े होते हैं, जिनकी लंबाई 3 से 4 फुट तक हो सकती है। इनका कंद खुरदुरा और इनका भीतरी भाग मक्खनी रंग का होता है। इसकी पैदावार भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में ज्यादा प्रचलित है। इसे खाने से गले में हल्की जलन हो सकती है।

कोववयूर: यह एक उन्नत किस्म का जिमीकंद माना जाता है, जिसे आमतौर पर हाइब्रिड बीज की प्रजाति भी कहा जाता है। इसका अंदरूनी भाग सफेद रंग का होता है। जिमीकंद की यह किस्म व्यापारिक किस्म भी मानी जाती है।

गजेन्द्र-1: गजेन्द्र-1 भी जिमीकंद की एक किस्म है, जिसके अंदर का गूदा हल्का नारंगी रंग का होता है। आमतौर पर यह घरों के बाहर और फूलों की नर्सरी में भी उगाया जाता है। खाने में सबसे ज्यादा गजेन्द्र-1 जिमीकंद का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसे खाने से गले में हल्की जलन हो सकती है।

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